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» »Unlabelled » करवा चौथ 2026: भोपाल में बादलों का साया, अगर न दिखे चांद तो सुहागिनें ऐसे पूरा करें व्रत

भोपाल में करवा चौथ पर बारिश का साया: अगर न दिखे चांद, तो सुहागिनें इस तरह खोलें अपना व्रत; जानें ज्योतिषीय उपाय


भोपाल: आज मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। चक्रवाती तूफान के असर और मौसम विभाग के अलर्ट के चलते आसमान में घने बादल छाए हुए हैं और बारिश हो रही है। ऐसे में करवा चौथ का निर्जला व्रत रख रहीं सुहागिन महिलाओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि रात को बारिश या बादलों के कारण चांद नहीं दिखा, तो वे अपना व्रत कैसे पूरा करेंगी?

ज्योतिषाचार्यों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौसम खराब होने की स्थिति में व्रती महिलाओं को परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। शास्त्रों में ऐसी परिस्थितियों के लिए बेहद सरल और पारंपरिक विकल्प बताए गए हैं, जिनका पालन करके व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न किया जा सकता है। 


भोपाल में चंद्रोदय का समय


पंचांग के अनुसार, भोपाल में चंद्रोदय (चांद निकलने) का संभावित समय रात 08:26 बजे है। यदि इस समय पर बादलों के कारण चांद सीधे नजर नहीं आता है, तो आप नीचे दिए गए तरीकों को अपना सकती हैं:


चांद न दिखने पर व्रत खोलने के 4 पारंपरिक उपाय


1. भगवान शिव के मस्तक के चंद्र दर्शन: भगवान शिव को 'चंद्रशेखर' कहा जाता है क्योंकि उनके मस्तक पर द्वितीय का बालचंद्र विराजमान है। यदि आसमान में चांद न दिखे, तो आप घर के मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर में दिख रहे चंद्रमा का ध्यान व पूजन कर सकती हैं। इसके बाद चंद्रदेव का स्मरण करते हुए अर्घ्य दें और व्रत का पारण करें।

2. चावल से बनाएं प्रतीकात्मक चांद: एक साफ थाली या चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और कच्चे चावल (अक्षत) की मदद से चंद्रमा की आकृति बना लें। इस प्रतीकात्मक चांद को छलनी से देखकर पूजा करें, 'ॐ सोमाय नमः' मंत्र का जाप करें और अर्घ्य देकर पति के हाथों जल ग्रहण करें।

3. चांदी के सिक्के की पूजा: ज्योतिष शास्त्र में चांदी का संबंध चंद्रदेव से माना गया है। आप एक साफ थाली में चांदी का सिक्का रखकर उसे चंद्रमा का प्रतीक मानकर रोली, अक्षत से पूजन कर सकती हैं और अर्घ्य की प्रक्रिया पूरी कर सकती हैं।

4. पंचांग के समय पर दिशा का ध्यान कर अर्घ्य: शास्त्रों के अनुसार, चंद्रमा का उदय होना और उसका दिखाई देना दो अलग बातें हैं। भले ही बादल चांद को छिपा लें, लेकिन चंद्रोदय अपने नियत समय पर हो जाता है। इसलिए पंचांग के समयानुसार (रात 8:26 बजे) पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके चंद्रदेव का मानसिक ध्यान करें, अर्घ्य दें और व्रत खोलें।


डिजिटल दौर का एक और विकल्प: वीडियो कॉल


आज के आधुनिक दौर में यदि भोपाल में मौसम ज्यादा खराब है और आपके किसी रिश्तेदार या मित्र के शहर में (जहाँ आसमान साफ हो) चांद दिख रहा है, तो आप वीडियो कॉल के जरिए भी चांद के दर्शन कर सकती हैं। वहां के चांद को देखकर आप अपने शहर के पंचांग समय के बाद अर्घ्य दे सकती हैं।

विशेष सलाह: सनातन धर्म और शास्त्रों के अनुसार, किसी भी व्रत का फल बाहरी परिस्थितियों से ज्यादा आपकी आंतरिक श्रद्धा, शुद्ध भाव और संकल्प पर निर्भर करता है। इसलिए मन में कोई संशय या डर न रखें और पूरी आस्था के साथ अपने त्योहार का आनंद लें।


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